पौड़ी में स्थित है मां ज्वाल्पा देवी का चमत्कारी धाम, अखंड ज्योति के रूप में विराजती हैं माता रानी
उत्तराखंड । उत्तराखंड की पावन धरा में 'मां ज्वाल्पा देवी सिद्ध पीठ' स्थित है। पौड़ी गढ़वाल जिले में, पौड़ी-कोटद्वार मार्ग पर नयार नदी के किनारे स्थित यह मंदिर आस्था और शक्ति का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मंदिर में माता रानी की कोई भी मूर्ति विराजमान नहीं है, बल्कि यहां माता रानी के 'ज्वाल्पा' स्वरूप की पूजा प्राकृतिक शिला और गर्भगृह में जल रही अखंड ज्योति के रूप में की जाती है। बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने भी माता रानी के मंदिर के महत्त्व पर जोर दिया और सभी भक्तों से यहां दर्शन करने की अपील भी की। इस अखंड दीप को प्रज्ज्वलित रखने के लिए प्राचीन काल से ही आसपास के क्षेत्रों (जैसे मवालस्यूं, कफोलस्यूं, खातस्यूं आदि पट्टियों के गांवों) से सरसों के तेल की व्यवस्था की जाती रही है। स्कंदपुराण के अनुसार, सतयुग में दैत्यराज पुलोम की पुत्री शची (इंद्राणी) ने देवराज इंद्र को पति के रूप में पाने के लिए यहीं पर माता पार्वती की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता पार्वती 'ज्वाला' (दीप्त ज्वलेश्वरी) के रूप में प्रकट हुईं और शची की मनोकामना पूर्ण की। तभी से यह स्थान ज्वाल्पा देवी के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
किंवदंतियों के अनुसार, 9वीं शताब्दी में आदिगुरु शंकराचार्य ने इस स्थान की यात्रा की थी और यहां प्रार्थना व साधना की थी। वर्तमान स्वरूप वाले इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1892 में स्व. दत्तराम अण्थवाल और उनके पुत्र बूथा राम अण्थवाल द्वारा की गई थी। मुख्य मंदिर के आसपास श्री हनुमान मंदिर, शिवालय, काल भैरव मंदिर और माँ काली के मंदिर भी स्थित हैं।
नवरात्रों में यहां भव्य मेले का आयोजन होता है और सच्चे मन से माँ के दर्शन करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह सिद्ध पीठ विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं और श्रद्धालुओं के बीच मनवांछित वर की प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र मानी जाती है।
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