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अमेरिका: ट्रंप के दूसरे टर्म पर जनमत की परीक्षा आज, राष्ट्रपति के सुर में दिखी हताशा

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लोकजीवन संवाददाता

03 नवम्बर 2026, 01:53 PM 4 मिनट में पढ़ें

अमेरिका: ट्रंप के दूसरे टर्म पर जनमत की परीक्षा आज, राष्ट्रपति के सुर में दिखी हताशा

न्यूयॉर्क । अमेरिकी मतदाता मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर अपना मत प्रकट करेंगे। 21 महीनों के उनके शासन पर फैसला सुनाएंगे। टैरिफ और ईरान संघर्ष के कारण उपजी आर्थिक उथल-पुथल को लेकर अपनी राय जाहिर करेंगे। पोल के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' (प्रतिनिधि सभा) पर कब्जा कर सकती है, जबकि सीनेट का भविष्य अनिश्चित है क्योंकि पार्टी के भीतर आखिरी समय में काफी उथल-पुथल मची हुई है। सोमवार को ट्रंप ने इस संभावना को स्वीकार कर लिया कि मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) में उनकी पार्टी का प्रदर्शन खराब रह सकता है, जैसा कि कई पोल में संकेत दिया गया है।

मंगलवार को होने वाली वोटिंग से पहले अपनी आखिरी रैली में उन्होंने कहा: "पता नहीं क्यों, लेकिन हमेशा सिटिंग राष्ट्रपति मध्यावधि चुनाव नहीं जीत पाते हैं। फिर भी, हमने पूरी ताकत लगा दी।"

ट्रंप के प्रचार अभियान की बात करें तो उन्होंने बिना रुके-थके 32 दिनों में 20 राज्यों में 30 रैलियां कीं। व्हाइट हाउस के अनुसार, उन्होंने वाशिंगटन में अपनी आखिरी चुनावी बैठक के लिए मिशिगन में होने वाली एक रैली रद्द कर दी थी।

वाशिंगटन रिफ्लेक्टिंग पूल के सामने उन्होंने डेमोक्रेट्स को "कम्युनिस्ट," "जिहादी," और "मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य" बताया। दावा ये भी किया कि ये लोग उनकी उपलब्धियों को "बर्बाद" कर देंगे।

उन्होंने ज्यादातर भाषण देश की राजधानी को सुंदर बनाने की कोशिशों पर किया, जबकि मतदाताओं को परेशान करने वाले आर्थिक मुद्दों का कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया।

पोल के आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप की स्थिति काफी कमजोर हुई है। 2024 के चुनाव में उन्हें 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन अब 'रियलक्लियर पॉलिटिक्स' (आरसीपी) के पोल अनुसार, कांग्रेसनल चुनावों में डेमोक्रेट्स को कुल 52.1 प्रतिशत समर्थन मिल रहा है।

आरसीपी के औसत अनुसार, उनके दूसरे कार्यकाल के पहले हफ्ते में उनकी 'जॉब अप्रूवल रेटिंग' (काम को लेकर समर्थन) 50.3 प्रतिशत थी, जो अब गिरकर 39.1 प्रतिशत रह गई है। वहीं, उनके काम को नापसंद करने वालों की दर बढ़कर 58.8 प्रतिशत हो गई है।

मध्यावधि चुनाव एक तरफ ट्रंप के अपने समर्थकों (बेस) पर उनकी पकड़ को परख रहे हैं, तो दूसरी तरफ यह महंगाई और लोगों की आर्थिक परेशानियों की हकीकत को भी सामने ला रहे हैं।

हालांकि हाल ही की तिमाही में अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है जिसे अर्थशास्त्री एक अच्छा प्रदर्शन मानते हैं, लेकिन सितंबर में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत थी। इसका सबसे ज्यादा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ा है। यह असर दो वजहों से है: एक तो वे टैरिफ जो ट्रंप ने आयात पर लगाए हैं, और दूसरा, होर्मुज टकराव के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आई तेजी का 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' (बढ़ता हुआ असर) है। होर्मुज पर टकराव ऐसा है जिसे उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर शुरू किया था।

लगभग 174 मिलियन मतदाताओं में से, 57 मिलियन लोगों ने सोमवार शाम तक ही डाक के जरिए या 'अर्ली वोटिंग' (समय से पहले मतदान) बूथों पर अपना वोट डाल दिया था, और बाकी लोगों को मंगलवार को अपना मत देने का मौका मिलेगा।

एनबीसी न्यूज की ट्रैकिंग के अनुसार, पार्टी के आधार पर पंजीकरण कराने वाले 'अर्ली वोटर्स' (समय से पहले मतदान करने वालों) में 46% डेमोक्रेट थे और 39% रिपब्लिकन। (अमेरिका में, नागरिक किसी पार्टी के सदस्य के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं, ताकि वे 'प्राइमरी' में वोट डाल सकें—यह पार्टी के भीतर होने वाला चुनाव है, जिसमें पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवारों को चुना जाता है।)

आरसीपी, सीबीएस न्यूज और कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट (सीपीआर) के तीन विश्लेषणों (जो जनमत सर्वेक्षणों पर आधारित हैं) में 435 सदस्यों वाले 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' (प्रतिनिधि सभा) में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है।

इन अनुमानों के अनुसार, डेमोक्रेट्स को कम से कम 222 सीटें (सीपीआर के अनुसार), 229 सीटें (सीबीएस के अनुसार) या 227 सीटें (आरसीपी के अनुसार) मिल सकती हैं।

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