नागदी बांध में गिरा कंटेनर, चालक की केबिन में दबने से दर्दनाक मौत
- बांध का सगस बाबा मोड़ बना डेंजर जोन - हफ्तेभर पहले इसी मोड़ पर पलटी थी यात्री बस
भीलवाड़ा लोकजीवन। जहाजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नागदी बांध की मुख्य सडक़ पर स्थित ‘सगस बाबा मोड़’ अब राहगीरों व वाहन चालकों के लिए खुला काल बन चुका है। बुधवार को मोड़ पर रफ्तार और असंतुलन का शिकार होकर एक बड़ा कंटेनर सीधे नागदी बांध में जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि कंटेनर के केबिन के परखच्चे उड़ गए और चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। चालक का शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त केबिन में फंस गया, जिसे कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका। महज एक सप्ताह के भीतर इसी जगह पर यह दूसरा बड़ा सडक़ हादसा है, जिसने सार्वजनिक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसा उस वक्त हुआ जब तेज गति से आ रहा कंटेनर सगस बाबा के तीखे मोड़ पर चालक के नियंत्रण से बाहर हो गया और रेलिंग को तोड़ते हुए बांध में जा गिरा। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण व राहगीर मौके पर दौड़े। सूचना मिलते ही डीवाईएसपी रेवड़मल मौर्य और जहाजपुर थाना पुलिस मय जाब्ते के घटनास्थल पर पहुंचे और तत्परता से राहत व बचाव कार्य शुरू किया।
बुरी तरह पिचका कंटेनर, अंदर फस गया शव
हादसे में कंटेनर बुरी तरह पिचक चुका था और चालक का शव अंदर लोहे की चादरों के बीच फंसा हुआ था। पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों ने करीब दो घंटे की भारी मशक्कत और कटर की मदद से केबिन को काटकर शव को बाहर निकाला। मृतक की पहचान शाहपुरा जिले के कादीसहना निवासी कन्हैयालाल बैरवा के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जहाजपुर उपजिला अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है।
सात दिन पहले 21 यात्रियों का छलका था खून
गौरतलब है कि ठीक एक सप्ताह पूर्व इसी सगस बाबा मोड़ पर यात्रियों से खचाखच भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी। उस दिल दहला देने वाले हादसे में 21 यात्री घायल हुए थे, जिनमें से 7 की हालत नाजुक होने पर उन्हें भीलवाड़ा रेफर करना पड़ा था। उस समय भी ग्रामीणों ने इस खतरनाक मोड़ पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम करने की मांग उठाई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने कागजी खानापूर्ति के अलावा धरातल पर कुछ नहीं किया। हफ्तेभर में ही इस मोड़ पर कंटेनर गिरने और चालक की जान जाने से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार, क्या बलि चढऩे का र्है इंतजार
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद क्षेत्र की सडक़ों पर सुरक्षा मानकों की पोल खुल गई है। क्षेत्रीय बाशिंदों और वाहन चालकों का कहना है कि यह मोड़ अंधा और बेहद संकरा है। यहां बांध की तरफ न तो कोई ठोस कंक्रीट का क्रैश बैरियर लगा है और न ही दूर से चमकने वाले रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड। मोड़ की तकनीकी बनावट में गंभीर खामियां हैं, जिसके चलते भारी वाहन अक्सर संतुलन खो बैठते हैं। चालकों के सवाल है कि बस हादसे में 21 लोगों के लहूलुहान होने के बाद भी पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभागों ने मोड़ पर मजबूत रेलिंग या बैरियर क्यों नहीं लगाए? क्या प्रशासन को किसी बड़े जनहानि वाले हादसे का इंतजार था? स्पीड ब्रेकर, कैट्स आई और चेतावनी संकेतक लगाने में आखिर किसकी लापरवाही आड़े आ रही है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सगस बाबा मोड़ पर तत्काल प्रभाव से स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक और मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं कराया गया, तो ग्रामीण चक्का जाम कर आंदोलन की राह पकड़ेंगे।
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