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भीलवाड़ा

नागदी बांध मोड़ बना खूनी ब्लैक स्पॉट,अंधेरे में पानी में समाई क्रेटा, मूर्तिकार की दर्दनाक मौत

- प्रशासन की घोर लापरवाही से हो रहे हादसे - 15 दिन में गई 2 लोगों की जानें, 22 घायल

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लोकजीवन संवाददाता

28 अक्टूबर 2026, 01:32 PM 4 मिनट में पढ़ें

नागदी बांध मोड़ बना खूनी ब्लैक स्पॉट,अंधेरे में पानी में समाई क्रेटा, मूर्तिकार की दर्दनाक मौत

 भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज।  लापरवाही, प्रशासनिक अनदेखी और सुरक्षा इंतजामों के अभाव ने जहाजपुर क्षेत्र के नागदी बांध मोड़ को मौत का खुला जाल बना दिया है। बुधवार की तडक़े हुए एक और भीषण हादसे ने साबित कर दिया है कि जिम्मेदारों के लिए आम नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं बची है। भोपाल से काम निपटाकर अपने घर लौट रहे दो मूर्ति कारीगरों की क्रेटा कार अनियंत्रित होकर सीधे गहरे बांध में जा गिरी। इस खौफनाक हादसे में एक कारीगर की पानी में दम घुटने से मौत हो गई, जबकि दूसरे ने बमुश्किल कार का शीशा तोडक़र अपनी जान बचाई। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद अब तक न तो यहां कोई मजबूत रेलिंग लगी है और न ही कोई सुरक्षा संकेतक, जिसके चलते यह मोड़ अब हादसों का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है।
अंधेरे में चीखता रहा वसीम, क्रेन और नाव से निकला शव

हादसा बुधवार सुबह करीब 4 बजे का है। मकराना निवासी अनीस और वसीम भोपाल के मंदिरों में मूर्तियां तराशने और लगाने का काम पूरा करके अपनी क्रेटा कार से घर लौट रहे थे। भोर के सन्नाटे और अंधेरे के बीच जैसे ही उनकी कार नागदी बांध के खतरनाक मोड़ पर पहुंची, वाहन अनियंत्रित हो गया और सीधे बांध के गहरे पानी में जा गिरा। कार डूबने लगी तो वसीम ने सूझबूझ दिखाई और खिडक़ी का कांच तोडक़र बाहर निकला। वह पानी में डूबी कार की छत पर खड़ा होकर अंधेरे में पागलों की तरह बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगा। सूनसान रास्ते पर गूंजती इन चीखों को सुनकर वहां से गुजर रहे कुछ राहगीर ठिठक गए। राहगीरों ने तुरंत जहाजपुर थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से रस्सियों के सहारे वसीम को सकुशल बाहर निकाला गया। इसके बाद शुरू हुआ अनीस को तलाशने का दर्दनाक अभियान। बांध के काले पानी में टॉर्च की रोशनी और नावों के जरिए डूबी हुई कार की खोजबीन की गई। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जब क्रेन की मदद से गाड़ी को पानी से खींचा गया, तब तक अनीस की सांसें थम चुकी थीं। गाड़ी की तलाशी लेने पर पुलिस को उसमें रखे 10 लाख रुपये नकद और एक लैपटॉप मिला, जिसे सुरक्षित वसीम के सुपुर्द कर दिया गया। मौत की खबर जब मकराना पहुंची, तो मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। घर लौटने की खुशी चंद पलों में मातम में बदल गई।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर भारी आक्रोश, कब जागेगा प्रशासन?
नागदी बांध पर हो रहे ये हादसे महज कोई इत्तेफाक नहीं हैं, बल्कि यह सडक़ निर्माण एजेंसी और स्थानीय प्रशासन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा हैं। यह मोड़ तकनीकी रूप से बेहद खतरनाक है, लेकिन इसके बावजूद: पानी की तरफ कोई मजबूत कंक्रीट की दीवार या लोहे की क्रैश बैरियर रेलिंग नहीं लगाई गई है। गाड़ी फिसलते ही सीधे अथाह पानी में गिरती है। रात के समय दूर से आने वाले चालकों को मोड़ का अंदाजा नहीं लगता। न तो यहां रिफ्लेक्टर लगे हैं, न रेडियम वाले दिशा-सूचक बोर्ड और न ही स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है। तीखे मोड़ से ठीक पहले रंबल स्ट्रिप या स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं, जिससे वाहन धीमी गति में मोड़ काट सकें।
15 दिनों का खूनी इतिहास, 3 बड़े हादसे, 2 मौतें और 22 लहूलुहान
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मोड़ पिछले 15 दिनों से लगातार खून मांग रहा है, लेकिन अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हैं। 14 अक्टूबर को  नागदी बांध के इसी मोड़ पर एक निजी यात्री बस बेकाबू होकर पलट गई थी। उस हादसे में बस में सवार 21 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे और चीख-पुकार मच गई थी। 22 अक्टूबर को बस हादसे के ठीक आठ दिन बाद एक भारी-भरकम कंटेनर अनियंत्रित होकर सीधे बांध में जा गिरा। पानी में डूबने से चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। बुधवार को कार पानी में गिर गई, जिसमें मूर्तिकार अनीस की जान चली गई और 10 लाख की नकदी व सामान के साथ दूसरा साथी जिंदगी और मौत के बीच झूल गया। 15 दिन के भीतर 2 लोगों की जान जाना और 22 लोगों का अस्पताल पहुंचना किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। यदि समय रहते इस मोड़ पर सुरक्षा की मजबूत दीवार, चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए, तो आने वाले दिनों में यह बांध और भी कई घरों के चिराग बुझा देगा।

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