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भीलवाड़ा

दीपावली की सफाई चमका रही है घर, पर बिगाड़ रही है सेहत

- धूल और पेंट के केमिकल नुकसानदायी - अस्पतालों में बढ़े एलर्जी व सांस के मरीज

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लोकजीवन संवाददाता

04 नवम्बर 2026, 01:01 PM 2 मिनट में पढ़ें

दीपावली की सफाई चमका रही है घर, पर बिगाड़ रही है सेहत


भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज। रोशनी और उमंग के पर्व दीपावली की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है, लेकिन घरों की चमक-दमक बढ़ाने वाला साफ-सफाई का यह दौर शहरवासियों की सेहत पर भारी पडऩे लगा है। साल भर से बंद पड़े कमरों, जालों और कबाड़ की सफाई के दौरान उडऩे वाला धूल का गुबार और रंग-रोगन  से उठने वाली रासायनिक गंध लोगों के लिए बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन गई है। अस्पतालों की ओपीडी में एलर्जी, खांसी और सांस फूलने की शिकायतों के साथ मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। महात्मा गांधी व टीबी अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, त्योहारी सफाई अभियान शुरू होने के बाद से अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक का उछाल आया है। इनमें सबसे अधिक मरीज आंखों में जलन, लगातार छींकें और सूखी खांसी से पीडि़त हैं। बीमारी का मुख्य कारण साल भर जमा धूल-मिट्टी के बारीक कण, जालों में पनपने वाले फंगल स्पोर्स और डस्ट माइट्स  (सूक्ष्म जीव) सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और गंभीर एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिर्फ धूल ही नहीं, बल्कि घरों में हो रहे पेंट, डिस्टेंपर और वार्निश से निकलने वाली तीखी गंध (केमिकल फ्यूम्स) भी सांस की नलियों में सूजन पैदा कर रही है, जिससे सिरदर्द और सांस फूलने जैसी समस्याएं उभर रही हैं। त्योहार की खुशियों के बीच सेहत को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। चिकित्सक कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं जैसे कि  सफाई या झाड़-पोंछ करते समय मुंह और नाक पर हमेशा एन-95 या डबल लेयर सूती मास्क पहनें। धूल उड़ाने के बजाय गीले कपड़े, मॉप (पोंछा) या वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें। पंखे या छत के जाले साफ करते समय चश्मा लगाएं और सिर को ढककर रखें। सफाई के तुरंत बाद कपड़े बदलें और गुनगुने पानी से स्नान करें। यदि सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकडऩ जैसी समस्या गंभीर हो, तो मेडिकल स्टोर से खुद दवा लेने के बजाय किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से तुरंत परामर्श लें।

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