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भीलवाड़ा

एमसीएच के पालने में मिले प्री-मैच्योर मासूम सोम की सांसों की जंग टूटी

-  29 घंटे बाद वेंटिलेटर पर उपचार के दौरान मौत - कल सुबह 7 बजे पालने में ठिठुरता मिला था

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लोकजीवन संवाददाता

03 नवम्बर 2026, 01:15 PM 3 मिनट में पढ़ें

एमसीएच के पालने में मिले प्री-मैच्योर मासूम सोम की सांसों की जंग टूटी

 भीलवाड़ा  लोकजीवन न्यूज। महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई के पालने में सोमवार सुबह ठिठुरते हुए मिले डेढ़ किलोग्राम वजनी प्री-मैच्योर नवजात सोम की सासें मंगलवार दोपहर 12.30 बजे आखिरकार थम गईं। पालने में मिलने के ठीक 29 घंटे बाद वेंटिलेटर पर उपचार के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की ओर से पोस्टमार्टम की कानूनी कार्रवाई पूरी करवाने के बाद बच्चे का अंतिम संस्कार करवाया जाएगा। सोमवार सुबह जब शहर में ठंड का असर था और लोग अपने घरों में थे, तभी एमसीएच यूनिट के बाहर लगे आश्रय पालना गृह की घंटी अचानक गूंज उठी। तीखी आवाज सुनते ही अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मी तुरंत बाहर दौड़े। पालने के भीतर कपड़े के चंद टुकड़ों में लिपटा हुआ एक अधमरा सा नन्हा वजूद पड़ा था। अपने ही जन्मदाताओं द्वारा ठंड में अनाथ छोड़ दिए गए इस मासूम का वजन तराजू पर तौले जाने पर मात्र  डेढ़ किलो ही पाया गया था।
फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने से थी गंभीर परेशानी

बच्चा प्री-मैच्योर (समय से पहले जन्मा) था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। यही कारण था कि वह हर एक सांस के लिए संघर्ष कर रहा था। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने नवजात को सोम नाम दिया था और अस्पताल में डॉक्टरों का एक विशेष बोर्ड गठित कर उसकी 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। सोमवार अलसुबह से ही एनआईसीयू वार्ड में वार्मर और ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे सोम अपनी नन्हीं सांसों को बचाने की आखिरी जिद में जुटा था। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन फेफड़ों की कमजोरी और ठंड के प्रभाव के चलते मासूम जिंदगी की यह जंग हार गया।
पुलिस कार्रवाई के बाद होगा अंतिम संस्कार
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने बताया कि प्रशासनिक औपचारिकताओं और पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद मासूम सोम का नियमानुसार अंतिम संस्कार करवाया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर समाज में नवजात शिशुओं को इस प्रकार असहाय छोड़ दिए जाने की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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