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राजस्थान

33 अफसरों की आई शामत! भजनलाल सरकार ने इंक्रीमेंट और पेंशन पर लगाई रोक

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लोकजीवन संवाददाता

29 अक्टूबर 2026, 12:33 PM 4 मिनट में पढ़ें

33 अफसरों की आई शामत! भजनलाल सरकार ने इंक्रीमेंट और पेंशन पर लगाई रोक

राजस्थान में भजनलाल सरकार ने भ्रष्टाचार, अवैध रेत खनन में कथित मिलीभगत, वित्तीय गड़बड़ियों और ड्यूटी में लापरवाही के मामलों में 33 मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। किसी अधिकारी की सालाना वेतन वृद्धि रोक दी गई, तो किसी की पेंशन पर कैंची चला दी गई। सरकार ने 17 सेवारत अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने और 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने या कम करने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए गड़बड़ी करने वालों को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा।
किसी की चार साल की इंक्रीमेंट पर रोक, किसी की पेंशन बंद

सरकार ने बड़ी पेनल्टी वाले 30 अनुशासनात्मक मामलों का निस्तारण करने के बाद 17 मौजूदा अधिकारियों की दो से चार सालाना वेतन वृद्धियां रोकने की मंजूरी दी है। वहीं, गंभीर अनियमितताओं के दोषी पाए गए 16 रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ पेंशन रोकने या कम करने की कार्रवाई की गई है।
मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में अवैध रेत खनन करने वालों और अपराधियों से कथित मिलीभगत के साथ आपराधिक मामलों की जांच में लापरवाही जैसे आरोप शामिल हैं। एक मामले में तत्कालीन सर्किल ऑफिसर (सीओ) पर अवैध रेत खनन और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ मिलीभगत करने तथा अनुचित लाभ लेने के आरोप सामने आए। इस मामले में चार सालाना वेतन वृद्धियां रोकने की मंजूरी दी गई।
पुलिस जांच में लापरवाही पर भी गिरी गाज
एक अन्य आपराधिक मामले में तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर (सीआई), असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) और एक कांस्टेबल को जांच में लापरवाही का दोषी पाया गया। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
सरकार ने सरकारी योजनाओं को लागू करने में लापरवाही बरतने और निर्धारित जिम्मेदारियां पूरी नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। अधिकारियों को यह संदेश दिया गया है कि कामकाज में गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी करने पर विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
आरएएस अफसर और डॉक्टर भी कार्रवाई की जद में
राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के एक अधिकारी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए कार्यों के निरीक्षण और रखरखाव में गंभीर लापरवाही के लिए दंडित किया गया है। वहीं, बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर तीन मेडिकल ऑफिसर्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
गलत तरीके से खून चढ़ाने से जुड़े एक गंभीर मामले में एक डॉक्टर की दो सालाना वेतन वृद्धियां रोकने की सजा दी गई है। इसके अलावा वन, हॉर्टिकल्चर और सचिवालय सेवा के अधिकारियों के खिलाफ भी आरोप साबित होने के बाद कार्रवाई की गई है। मेडिकल एवं हेल्थ, सामाजिक न्याय, खान, कॉलेज शिक्षा और देवस्थान विभाग से जुड़े मामलों में भी सरकार ने अनुशासनात्मक फैसले लिए हैं।
रिटायरमेंट के बाद भी नहीं मिली राहत, 100% पेंशन पर रोक
सरकार की कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि सेवानिवृत्ति को गंभीर अनियमितताओं से बचने का रास्ता नहीं माना गया। वित्तीय गड़बड़ियों और अन्य गंभीर नियम उल्लंघनों के मामलों में 16 रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन रोकने या घटाने के आदेश जारी किए गए हैं।
राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने का दोषी पाया गया। इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हुआ। इसके बाद सरकार ने उनकी 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया।
दो रिटायर्ड आरएएस अधिकारियों की पेंशन भी कटी
एक अन्य मामले में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों को आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों को गलत तरीके से कृषि भूमि बताने से जुड़े मामले में जिम्मेदार पाया गया। इस गड़बड़ी के कारण सरकार को भारी वित्तीय नुकसान होने की बात सामने आई। कार्रवाई के तहत दोनों अधिकारियों की पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा पांच साल तक रोकने का आदेश दिया गया है।
आठ मामलों में अधिकारियों को मिली राहत
सरकार ने कार्रवाई के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि अनुशासनात्मक फैसले नियमों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही लिए जाएंगे। राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत आठ मामलों में विस्तृत जांच के दौरान आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों को राहत दी गई।

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