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राजस्थान

40 विला-कॉटेज का खेल में सरकार ने मांगा हिसाब  आईएएस शिखर अग्रवाल को 7 दिन का अल्टीमेटम

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लोकजीवन संवाददाता

03 नवम्बर 2026, 10:38 AM 6 मिनट में पढ़ें

40 विला-कॉटेज का खेल में सरकार ने मांगा हिसाब 
आईएएस शिखर अग्रवाल को 7 दिन का अल्टीमेटम

राजस्थान में 40 विला-कॉटेज खरीदने के मामले में आईएएस शिखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी का ब्योरा देने के मामले में उन्हें नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। कार्मिक विभाग ने पूछा है कि आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम खरीदी गई प्रॉपर्टी को सालाना इम्मूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (आईपीआर) में क्यों नहीं दिखाया गया। इस मामले में जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर सरकार की ओर से सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
30 अक्टूबर को जारी कारण बताओ नोटिस में मीडिया में सामने आए खुलासे का भी जिक्र किया गया है। मामला सिर्फ करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिखर अग्रवाल को अब तय समय में अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद कार्मिक विभाग आगे की कार्रवाई पर फैसला कर सकता है।

एक कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदे, फिर उसी को दे दिए लीज पर
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू प्रॉपर्टी खरीदने और फिर उसे लीज पर देने का है। आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से राजस्थान में कुल 40 विला-कॉटेज खरीदे थे। इनमें अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज शामिल हैं। इन संपत्तियों को खरीदने में कुल 6 करोड़ 16.5 लाख रुपये खर्च किए गए। खास बात यह है कि खरीदने के बाद सभी विला-कॉटेज उसी कंपनी को लीज पर दे दिए गए, जिससे इन्हें खरीदा गया था। इस सौदे की शर्तों और संपत्तियों के ब्योरे को लेकर अब मामला जांच के दायरे में है। जानकारी के मुताबिक, बुझड़ा के 20 कॉटेज चार लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना किराये पर दिए गए, जबकि अजबगढ़ के 20 विला का सालाना किराया पांच लाख रुपये प्रति विला तय किया गया। इस तरह दोनों जगह की संपत्तियों से सालाना कुल 1.80 करोड़ रुपये की लीज आय का हिसाब सामने आया है।
28 संपत्तियों में से रिकॉर्ड में सिर्फ 14 का ब्योरा
प्रॉपर्टी रिटर्न को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम अजबगढ़ और बुझड़ा में कुल 28 विला-कॉटेज होने की जानकारी सामने आई, लेकिन सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न में सिर्फ 14 संपत्तियां ही दर्ज मिलीं। रिकॉर्ड के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को भरे गए अपने आईपीआर में 14 विला-कॉटेज का ब्योरा दिया है। वहीं, प्रशाखा माथुर की ओर से 8 जनवरी 2026 को भरे गए आईपीआर में प्रॉपर्टी की जानकारी शून्य दर्ज है, जबकि उनके नाम पर भी 14 विला-कॉटेज खरीदे जाने की बात सामने आई है। अलवर के अजबगढ़ स्थित विला का ब्योरा प्रॉपर्टी रिटर्न में नहीं दिए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, शिखर अग्रवाल का दावा रहा है कि उन्होंने अपनी ओर से पूरी जानकारी दी थी, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में इसे अपडेट नहीं किया गया। अब कार्मिक विभाग के नोटिस के जवाब में उन्हें इसी तरह के सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में खुलासा होने के बाद आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर को उनके पदों से हटाकर एपीओ किया जा चुका है। वहीं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 31 अक्टूबर को शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
पुरानी फाइलें भी खंगाल रही एसीबी
आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर बाजार भाव से काफी कम कीमत पर कई दर्जन रिसॉर्ट विला खरीदने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अब उनके पुराने कार्यकाल की फाइलें भी खंगाल रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उदयपुर जिला कलेक्टर रहने के समय से लेकर अलग-अलग पदों पर तैनाती के दौरान ऐसे कौनसे फैसले लिए गए, जिनमें किसी कंपनी या व्यक्ति को कथित तौर पर अनुचित फायदा पहुंचाया गया हो। एसीबी की शुरुआती जांच फिलहाल विला खरीद मामले और निजी कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर दिए गए लाभों पर केंद्रित है। हालांकि, अब जांच एजेंसी उनके पुराने सरकारी रिकॉर्ड, फैसलों और संबंधित विभागों की रिपोर्ट भी देख रही है। इससे जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है।
उदयपुर कलेक्टर से अब तक का रिकॉर्ड खंगाल रही एसीबी
एसीबी के सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी शिखर अग्रवाल के उदयपुर जिला कलेक्टर रहने के समय से लेकर अब तक के कार्यकाल से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसमें ऐसे फैसलों और लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें कथित पक्षपात या किसी को अनुचित लाभ देने की आशंका हो सकती है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए किन फैसलों की गहराई से जांच करने की जरूरत है। हालांकि, अभी तक पुराने कार्यकाल से जुड़े किसी अन्य मामले में गड़बड़ी साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
गोयल फैशन्स को क्या-क्या फायदा मिला, इसकी तलाश
एसीबी की जांच का अहम पहलू यह पता लगाना है कि गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर कितने और किस तरह के फायदे दिए गए। ब्यूरो पहले आरोप लगा चुका है कि शिखर अग्रवाल ने कंपनी के निदेशकों के साथ मिलीभगत कर अपने पद का दुरुपयोग किया और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट देने, अनिवार्य प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना मंजूरियां जारी करने और विशेष रियायती वित्तीय पैकेज देने जैसे बिंदु शामिल हैं। एसीबी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन फैसलों से कंपनी को वास्तविक तौर पर कितना फायदा हुआ और सरकारी स्तर पर लिए गए निर्णयों की प्रक्रिया क्या थी। ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कंपनी को दिए गए लाभों की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए जांच जारी है।
सिर्फ अग्रवाल के विला नहीं, दूसरे खरीदारों की डील भी जांचेगी एजेंसी
जांच का एक और अहम बिंदु यह है कि क्या इसी कंपनी ने दूसरे निवेशकों को भी इसी तरह के विला बाजार भाव से काफी कम कीमत पर बेचे थे। एसीबी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ऐसे सौदे हुए या नहीं और यदि हुए तो उनकी शर्तें क्या थीं। इस पड़ताल से यह समझने में मदद मिल सकती है कि विला की कीमतों में कथित अंतर किसी खास खरीदार तक सीमित था या दूसरे निवेशकों को भी इसी तरह की रियायत मिली थी। हालांकि, दूसरे खरीदारों को सस्ती कीमत पर विला बेचे जाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
 

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