अमेरिका में बैठे आईएएस शिखर अग्रवाल पर तय हुआ एसीबी एक्शन प्लान, क्या आईपीएस पत्नी भी आएगी जांच घेरे में?
जयपुर: आईएएस शिखर अग्रवाल और आईपीएस प्रशाखा माथुर पर 40 विला केस में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों नेपूरी ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा दिया है। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार पर अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को हवाला देते हुए एसीबी को इस केस में जांच करने के आदेश दिए हैं। पहले इस मामले में शिखर अग्रवाल को एपीओ किया गया। अब उनकी पत्नी पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर तैनात प्रशाखा माथुर को सरकार ने तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर (एपीओ) कर दिया है।
मुख्य सचिव और एसीबी डीजी की बैठक में तय हुआ केस
बताया जा रहा है कि सीनियर IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के अमेरिका में होने के बावजूद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उनके खिलाफ कार्रवाई करना तय कर लिया था। जानकारी मिली है कि मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में मामले की फाइलें खंगाली गईं और फिर जांच की दिशा तय की गई।
अमेरिका से लौटते ही एसीबी करेगी पूछताछ
बैठक के तुरंत बाद मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर सरकार की भ्रष्टाचार पर स्पष्ट मंशा जाहिर की । राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलते ही एसीबी ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने, सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने और निजी फर्म को अनुचित लाभ देने के आरोपों में प्राथमिक जांच दर्ज कर ली। आगे योजना यह बताई जा रही है शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के अमेरिका से वापस लौटते ही एसीबी उन्हें समन देकर आमने-सामने की पूछताछ के लिए तलब करेगी। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार आईएएस- आईपीएस कपल अभी अपने बच्चों से मिलने के लिए अमेरिका गए हुए हैं।
अनंता रिसॉर्ट्स और कौड़ियों के दाम 40 विला खरीदने का मामला आया सामने
एसीबी की इस महा-कार्रवाई की मुख्य वजह एक निजी हॉस्पिटैलिटी फर्म 'गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड' (अनंता रिसॉर्ट्स) के साथ हुआ संदिग्ध लेनदेन बताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उदयपुर और अलवर जैसे पर्यटन स्थलों पर इस कंपनी से कौड़ियों के दाम पर लगभग 40 लग्जरी विला और कॉटेज खरीदे गए थे। इन संपत्तियों का मालिकाना हक जिस तरह से विभाजित किया गया है, वही इस पूरी गड़बड़ी की सबसे अहम कड़ी है। कुल 40 विलाओं में से 10 विला सीधे आईएएस शिखर अग्रवाल के नाम पर हैं, जबकि 10 विला उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम पर पंजीकृत पाए गए हैं। बाकी बचे 20 कॉटेज अधिकारियों के बेटों और सास-ससुर के नाम पर खरीदे गए थे। बदले में आईएएस अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण के नियमों में भारी छूट दी। साथ ही बिना किसी भौतिक सत्यापन के वित्तीय पैकेज मंजूर किए।
जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी, दोनों अफसरों पर दर्ज हो सकती है FIR!
हालांकि एसीबी ने अभी तक औपचारिक रूप से मुख्य मामला शिखर अग्रवाल के खिलाफ ही केंद्रित रखा है, लेकिन जिस तरह से 10 विला की सीधी हिस्सेदारी आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम दर्ज है, उससे उनका जांच के घेरे में आना लगभग तय माना जा रहा है। कानूनी जानकारों और सूत्रों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पारिवारिक संपत्तियों के अर्जन को केवल एक व्यक्ति की कार्रवाई मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। एसीबी बहुत जल्द आईपीएस माथुर को पूछताछ के लिए समन जारी कर सकती है और यह पड़ताल करेगी कि इन संपत्तियों के भुगतान का स्रोत क्या था। यदि प्राथमिक जांच में यह साबित होता है कि इन विला की आड़ में पद का दुरुपयोग कर काली कमाई को सफेद किया गया था, तो एसीबी जल्द ही औपचारिक एफआईआर दर्ज कर दोनों अफसरों के खिलाफ बड़ी विधिक कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाएगी।
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