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भीलवाड़ा

टूटी दीवारें और पसरा कचरा फिर भी सिंचाई विभाग कर रहा मेजा बांध का पानी नहर में छोडऩे की तैयारी

- रखरखाव के अभाव में जगह-जगह से क्षतिग्रस्त नहर - पानी छोड़े जाने पर रिसाव के साथ नहर के टूटने का खतरा

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लोकजीवन संवाददाता

02 नवम्बर 2026, 01:07 PM 2 मिनट में पढ़ें

टूटी दीवारें और पसरा कचरा फिर भी सिंचाई विभाग कर रहा मेजा बांध का पानी नहर में छोडऩे की तैयारी

 भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज। शहर की जीवन रेखा कहे जाने वाले मेजा बांध से एक बार फिर से खेतों को सींचने के लिए पानी छोडऩे की तैयारियां सिंचाई विभाग द्वारा की जा रही हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि पानी छोडऩे से पहले बांध की मुख्य और वितरक नहरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। मेजा बांध की नहरें इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। रखरखाव के अभाव में नहरें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और उनमें भारी मात्रा में गंदगी व कचरा अटा पड़ा है। वर्तमान में मेजा बांध की नहरों की स्थिति काफी खराब है। देखरेख के अभाव में नहरों के अंदर और आसपास लंबी घास, झाडिय़ा और बबूल के पेड़ उग आए हैं। कई जगह पक्की दीवारें और संरचनाएं टूट चुकी हैं, जिससे पानी छोड़े जाने पर रिसाव होने या नहर के टूटने का खतरा मंडरा रहा है।
पॉलीथिन और कचरे से अटा सिस्टम

नहरें जल प्रवाह का मार्ग होने के बजाय कचरा पात्र बन चुकी हैं। इनमें चारों तरफ प्लास्टिक की थैलियां, घरेलू कचरा और मलबा बिखरा हुआ है। जल निकासी के पाइपों और रास्तों के आगे गंदगी के ढेर लगे होने के कारण पानी का सुचारू रूप से आगे बढ़ पाना असंभव नजर आ रहा है। यदि समय रहते इस कचरे को साफ नहीं किया गया, तो पानी टेल एंड तक पहुंचने से पहले ही या तो रास्ते में रुक जाएगा या क्षतिग्रस्त दीवारों से बहकर बर्बाद हो जाएगा।
किसानों की बढ़ी चिंता, विभाग मौन
जैसे-जैसे सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की सुगबुगाहट तेज हो रही है, वैसे-वैसे अन्नदाताओं की चिंताएं भी बढऩे लगी हैं। किसानों का कहना है कि हर साल कागजों में सफाई और मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने रहते हैं। यदि टूटी हुई नहरों और मलबे के साथ पानी छोड़ा गया, तो खेतों तक पानी पहुंचना तो दूर, आसपास की बस्तियों और रास्तों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या सिंचाई विभाग नींद से जागकर पानी छोडऩे से पहले इन नहरों की सुध लेता है या फिर किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा? 

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