सरकार में बैठे नेताओं और अफसरों के बीच शह-मात का खेल चल रहा - डोटासरा
जयपुर, राजस्थान में आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ करने के मामले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूरे मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रवर्तन निदेशालय सीबीआई और इनकम टैक्स से जांच करवाने की चुनौती दी। डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा- मुख्यमंत्री मगरमच्छ ढूंढ रहे थे, मुख्यमंत्री को मगरमच्छ मिलने शुरू हो गए होंगे। डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार के पाप का घड़ा भर चुका है और अब फूटने लगा है। अभी तो केवल सुराग सामने आ रहे हैं। पहले सुधांश पंत को हटाया गया, फिर शिखर अग्रवाल को यहां से हटाया गया और अब डीजीपी बनने की कहानी शुरू हो गई। सरकार में बैठे नेताओं और अफसरों के बीच शह-मात का खेल चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह भ्रष्टाचार के खुलासों की शुरुआत और पहली कड़ी है।
अभी तो पार्टी शुरू हुई है, कांग्रेस खोलेगी कच्चे चिट्ठे’
डोटासरा ने कहा कि अभी तो देखना, पार्टी शुरू हुई है। कांग्रेस ने अभी शुरुआत भी नहीं की है। भाजपा के लोग खुद ही एक-दूसरे की गिरेबान पकड़कर झटका रहे हैं। जिस दिन कांग्रेस इनके कच्चे चिट्ठे खोलेगी, उस दिन इन्हें मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के भीतर क्या चल रहा है, यह अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है। डोटासरा के मुताबिक, अभी तक ब्यूरोक्रेसी के अधिकारियों से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन आगे राजनेताओं से जुड़े मामले भी सामने आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में मौजूदा सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
सीएमओ में सबसे नजदीकी अफसर के फैसले मुख्यमंत्री के फैसले माने जाते हैं’
डोटासरा ने शिखर अग्रवाल की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि जो अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री के सबसे नजदीक था, उसका पद छोटा नहीं होता। ऐसे अधिकारी के फैसलों को मुख्यमंत्री के फैसलों के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी को जो भी राहत दी गई, वह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी ने दी थी। ऐसे में मुख्यमंत्री को खुद इस पूरे मामले की जांच करवानी चाहिए। डोटासरा ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित फैसले किन परिस्थितियों में लिए गए और उनमें किसकी भूमिका थी।
‘जिसने दो साल सरकार चलाई, वह ऐसे ही थोड़े बैठा रहेगा’
डोटासरा ने पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिसने दो साल तक सरकार चलाई हो, वह ऐसे ही थोड़े बैठा रहेगा। राजनीति में जब नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं तो अफसर बच जाते हैं, लेकिन जब अफसर ही एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगते हैं, तो इसकी आंच सरकार तक भी पहुंचती है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डोटासरा ने दावा किया कि अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान के पीछे कई ऐसे मामले हैं, जिनका खुलासा आगे हो सकता है। डोटासरा ने अधिकारियों के तबादलों और उनके बीच चल रही खींचतान को भाजपा का अंदरूनी खेल बताया। उन्होंने कहा कि किस अफसर से किसको निपटाना है और कागज कहां से लाने हैं, यह सब भाजपा के भीतर तय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लोग खुद ही एक-दूसरे के भेद खोलने में लगे हैं।
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